Wednesday, November 30, 2022
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यूपी चुनाव का अंतिम यानि सांतवा चरण आज, वाराणसी, आजमगढ़ सहित 9 जिलें की 54 सीटों पर हो रहें मतदान

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लखनऊ: त्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022(UP Assembly Elecion 2022)  का आज अंतिम यानि सांतवे चरण का चुनाव हो रहा है। बता दें यूपी चुनाव के सातवें चरण में पूर्वांचल के 9 जिलों की 54 विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहा है, जहाँ पर 613 उम्मीदवारों की किस्मत का निर्णय होना है। देखा जाए तो राज्य की सत्ता के लिहाज से यह चरण सबसे महत्वपूर्ण चरण है। जिसके कारण भाजपा के सामने अपने सियासी वर्चस्व को बचाए रखने की लड़ाई तो है ही, साथ ही सपा और बसपा अपने पुराने गढ़ को बचाने के लिए लड़ती नज़र आ रही हैं। इतना ही नहीं जातीय आधार वाले छोटे-छोटे राजनीतिक दलों की वास्तविक परीक्षा इसी चरण में ही होनी है।

दरअसल, पीएम नरेंद्र मोदी(PM Narendra Modi) के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव(Akhilesh Yadav) के आजमगढ़ संसदीय सीट पर भी वोट डाले जाने है, तो अपना दल की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल(Anupriya Patel) के भी संसदीय सीट मिर्जापुर में भी आज मतदान हो रहा है। आपको बता दें, इस समय जेल में बंद मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी(Abbas Ansari) और भारतीय सुहेलदेव समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर(Om Prakash Rajbhar), दारा सिंह चौहान(Dara Singh Chauhan) जैसे दिग्गज नेताओं के भाग्य का फैसला भी चुनाव के इसी चरण में होगा।

सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022(UP Assembly Election 2022) के सातवें यानि अंतिम चरण में पूर्वांचल के 9 जिलों में आज मतदान हो रहा है। जिन जिलों में आज अंतिम चरण में मतदान हो रहा है, उनमें आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, जौनपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, गाजीपुर, चंदौली और सोनभद्र जिले शामिल है। बता दें, इन जिलों की 54 सीटों पर आज वोट डाले जा रहें है।

यदि बात आजमगढ़ और जौनपुर जिले की की जाए तो इन जिलों को समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है, तो मऊ और गाजीपुर में उसके सहयोगी सुभासपा के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर(Om Prakash Rajbhar) और जनवादी पार्टी के प्रमुख संजय चौहान(Sanjay Chauhan) का प्रभाव अधिक माना जाता है। वहीं, बाकी के जिलों में भारतीय जनता पार्टी(BJP) और उसके सहयोगी अपना दल का असर माना जाता है।

ऐसे में प्रत्येक राजनीतिक पार्टियों ने अपने-अपने गढ़ के अलवा भी अन्य जिलों में अपनी एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाया है। चाहे वो सपा की ओर से अखिलेश यादव(Akhilesh Yadav) की रैली हो या फिर भाजपा की ओर से पीएम मोदी का वाराणसी दौरा हो, या तो फिर काँग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी और राहुल गांधी की जनसभा हो, हर किसी ने अपने सियासी वर्चस्व को बचाने की पूरी कोशिश की है। सभी राजनीतिक पार्टियों की किस्मत का फैसला 10 मार्च को चुनाव के नतीजे के साथ ही होगा।

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